पुरातत्व संग्रहालय
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सागर I सतगढ़-कढ़ान माध्यम सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र खानपुर में बिखरे पड़े पुरातात्विक महत्व के 19 पुरावशेषों को उठवा कर पुरातत्व विभाग के संरक्षण में जिला पुरातत्व संग्रहालय पहुंचाया गया है। अपर कलेक्टर व जिला पर्यटन कौंसिल प्रभारी रुपेश कुमार उपाध्याय के मार्गदर्शन में गठित दल पुरातत्व संरक्षण के इस महत्वपूर्ण कार्य को करा रहे है।
उल्लेखनीय है कि सागर इंटेक चेप्टर ने खानपुर के डूब क्षेत्र में इस पुरा संपदा के पड़े होने की सूचना दी थी। इसके पश्चात जिला कलेक्टर ने एएसआई व स्टेट आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट से डूब क्षेत्र के आर्किटेक्ट का दस्तावेजीकरण कराया।

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इसके पश्चात इनमें से महत्वपूर्ण प्राचीन प्रतिमाएं, कलात्मक प्रस्तर, अभिलेख युक्त स्तंभ आदि को जिला पुरातत्व संग्रहालय में रखवाने और प्रदर्शित करने का निर्णय अपर कलेक्टर उपाध्याय ने लिया। इस पर निरंतर कार्य चल रहा है और अभी तक लगभग 45 पाषाण कलाकृतियों को डूब क्षेत्र से पुरातत्व विभाग की देख रेख में उठावा कर जिला पुरातत्व संग्रहालय में संरक्षित कर लिया गया है। इस अवसर पर सुजीत गोस्वामी, रजनीश जैन, नायब तहसीलदार विजय चौधरी, जल संसाधन विभाग के अधिकारी सहित अन्य अधिकारी एवं ग्राम के रघुनाथ आदिवासी स्थानीय जानकार मौजूद थे।

कल्चुरी कालीन मंदिरों के भग्नावशेषों की यह कलाकृतियां

अभी तक खोजे गए इतिहास के अनुसार सागर से 12 किमी नरयावली रोड पर स्थित बेरखेरी सुवंश ग्राम पंचायत के अंतर्गत खानपुर ग्राम के वन क्षेत्र में कल्चुरी कालीन मंदिरों के भग्नावशेषों की यह कलाकृतियां हैं। पूर्व में यहां से सन् 850 ईसवी के आसपास का कल्चुरि राजवंश के नरेश शंकरगण का अभिलेख यहां से मिल चुका है जिसमें मंदिर निर्माण का उल्लेख है। यह अढिलेख वर्तमान में डा. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग के संग्रह में रखा गया है। वर्तमान सर्वे में कुछ लघु स्तंभ लेखों के हिस्से भी यहां मिले हैं। यहां मिली प्रतिमाओं में उमा महेश्वर, गणेश, हनुमान जी, नवग्रह आदि प्रमुख हैं।


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