समापन दिवस पर पार्श्व गायक सुखविंदर सिंह ने हिट गीतों से आडिएंस को मस्त कर दिया
सागर। डोहेला खुरई महोत्सव - 2025 के अंतिम दिवस भव्य आतिशबाजी के साथ आरंभ हुई बालीवुड के मशहूर सिंगर सुखविंदर सिंह ने अपने हिट गीतों की झड़ी लगा दी। भीषण ठंड के बावजूद हजारों दर्शक देर रात तक झूमते रहे। ठंड के प्रकोप को देखते हुए पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने डोहेला महोत्सव को मकर संक्रांति के स्थान पर फरवरी माह में शिवरात्रि पर किए जाने की घोषणा कर दी है।
पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने सरस्वती वंदना व कन्यापूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि यह दसवां वर्ष है। अगले वर्ष से शिवरात्रि के अवसर 5 दिवसीय डोहेला महोत्सव होगा। हालांकि संक्रांति का मेला जैसा लगता है वह प्रतिवर्ष लगेगा। उन्होंने कहा कि तब फरवरी के माह में ठंड नहीं होगी और दर्शक देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद ले पाएंगे।
सुखविंदर ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत मशहूर गीत “छैंया छैंया“ से की। यह गीत मंच पर उनके सहकलाकारों के साथ बड़ी खूबसूरती के साथ प्रस्तुत हुआ जिसमें उन्होंने कुछ मूल गीत के साथ कुछ नये प्रयोग किए। गिटारिस्ट, फ्लूट प्लेयर को भी अपना काम दिखाने का अवसर उन्होंने दिया।
पहला गीत गाने के बाद सुखविंदर खुरई की जनता से मुखातिब हुए और उन्होंने कहा कि मैं रहता मुंबई में हूं, पंजाब का हूं लेकिन गेंहू मैं मध्यप्रदेश और खुरई का खाता हूं।
ताल फिल्म का हिट गीत “मैं रमता जोगी“ उनकी अगली प्रस्तुति थी। इस बार फिर कुछ नये साजिंदे अपने वाद्ययंत्र लेकर मंच के रैंप तक अपना परफार्मेंस दिखाने सामने आए। गीत के दौरान वे खुद वादकों को रैंप तक लेकर आते रहे। स्टेज परफार्मेंस में मूल गीत के साथ संगीत और गायन के नये प्रयोग सुखविंदर की प्रस्तुति को विशिष्ट बनाते हैं।
“हौले हौले से हवा लगती है हौले से दवा लगती है“... गीत की प्रस्तुति तक आडिएंस कड़ाके की सर्दी को भूलकर पूरी तरह चार्ज होकर सुखविंदर के साथ झूम रही थी। उनके गायन में आरोह अवरोह, उनकी आवाज का बेस और मीटर इस गाने में खुल कर सामने आया। उनका चौथा गीत बनठन चली बोलो ऐ जाती ऐ जाती रे, पैरों में तेरे घुंघरू की पैजनियां... था। और फिर लगातार एक के बाद हिट गीत वे बरसाते रहे और दर्शक उनके साथ मस्त होते चले गए।
ग्रीन ग्रास के ओपन ग्राऊंड में उन्होंने गाया “ न हगिलास न गिलाफ ठंडी हवा भी खिलाफ ससुरी... बीड़ी जलई ले जिगर से पिया जिगर में बड़ी आग है।“ इस गाने में उनके गीत के साथ झूमते गाते दर्शकों में करंट जैसा फैल गया। आयो रे आयो ढोलना में ढोल नगाड़ों के साथ दर्शकों को मंच के साथ नाचते देखना जोश भरा अनुभव था।
भूपेन्द्र भैया ने खुरई का विकास एक विजन के तहत किया, खुरई महोत्सव इसी का हिस्साः अविराज सिंह
अविराज सिंह ने कार्यक्रम के पूर्व खुरई वासियों के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि हम सबके नेता भूपेंद्र भैया के कार्यों की गूंज खुरई और मध्यप्रदेश के भी आगे पहुंचती है। उन्होंने आधुनिक खुरई का विकास एक विजन के तहत किया। यह महोत्सव भी इसी का हिस्सा है। सिंहस्थ की जिम्मेदारी, महाकाल लोक का लोकार्पण, भोपाल जेल ब्रेक घटना के बाद 8 आतंकवादियों का एनकाउंटर करना ऐसे अनेक काम हैं जो उनकी कार्यकुशलता बताते हैं। जनसेवा, गरीब का कल्याण ईश्वर की पूजा के समान है यह उनकी सीख है। भारत की संस्कृति,सनातन की वैश्विक प्रतिष्ठापना का उद्देश्य भूपेंद्र भैया के जीवन का मूलमंत्र है। अविराज ने कहा कि गीता से ज्ञान मिला रामायण से राम, भाग्य से हिंदू धर्म मिला किस्मत से हिंदुस्तान। भारतभूमि पर जन्म लेना बड़ा सौभाग्य है। जीवन में राष्ट्र को सबसे आगे रखना हर नागरिक का सबसे बड़ा धर्म।
फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित हैं सुखविंदर
सुखविंदर सिंह को बॉलीवुड में पार्श्वगायन के लिए जाना जाता है। ’दिल से’ फिल्म के उन्हें छैंया छैंया गाने से उन्हें प्रसिद्धि मिली जिसके लिए उन्होंने 1999 फिल्मफेयर पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्वगायक का पुरस्कार जीता है। पूर्व मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह के प्रयासों से ही यह संभव हो पाया है कि इतने बड़े सेलिब्रिटी आर्टिस्ट की प्रस्तुति खुरई के डोहेला मंच पर हुई। शायद ही ऐसा कोई ख्याति प्राप्त कलाकार बचा हो जो खुरई के इस विशाल महोत्सव में न आया हो।
सुखविंदर सिंह ने फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर में मशहूर “जय हो“ गीत गाया जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीत के लिए ग्रैमी अवार्ड मिला। उन्हें अपने गायन के लिए कुल दो फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार भी मिले हैं। तीन दिन चले डोहेला महोत्सव को प्रसिद्ध होस्ट प्रिया बरडे ने होस्ट किया।