ज्योति शर्मा/सागर। गणेश चतुर्थी के दौरान प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी मूर्तियों के विसर्जन से जल प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है। इस चिंता को देखते हुए, इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों का चलन बढ़ रहा है, जो पर्यावरण के प्रति जागरूकता और संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सागर ढाना के एक अधिवक्ता 11 वर्षो से इस कार्य मे लगे हुए है। मध्यप्रदेश शासन के अपर लोक अभियोजक एवं सामाजिक कार्यकर्ता दीपक पौराणिक के द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी गौ माता के गोबर गोमूत्र पंचगव्य तथा शुद्ध मिट्टी और पवित्र नदियों गंगा ,नर्मदा ,बेबस नदियों के जल को मिलाकर छोटी-छोटी गणेश प्रतिमा का निर्माण निर्माण किया जा रहा है और इन प्रतिमाओं का निःशुल्क किया जाएगा।

दीपक पौराणिक ने बताया कि भगवान गणेश जी प्रतिमाओं का निर्माण एवं निःशुल्क वितरण 11 वर्षो से भगवान गणेश के आशिर्वाद से हो रहा है,तथा यह आयोजन का 12 बारहवा वर्ष है। हमारा उद्देश्य है कि भगवान गणेश जी की प्रतिमा का विधि-विधान से प्रत्येक घर मे पूजन हो और पीओपी से निर्मित गणेश प्रतिमा का कम से कम उपयोग हो,साथ ही प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण भी हो सके,11 वर्षों से हमने गणेश जी प्रतिमा का निःशुल्क वितरण किया है साथ ही वितरण के उपरांत कई बार इन प्रतिमाओं का घर में ही विसर्जन गंगा नर्मदा जल मिलाकर कुंड पात्र में किया है।

साथ ही भगवान के घर मे पूजन से रिद्धि सिद्धि शुभ लाभ और प्रत्येक कार्य बिना बाधा बिपत्ति हो,रोगों का नाश हो,जीवन मे सफलता मिले भगवान श्री गणेश जी आशीर्वाद रहे, इस कामना से भगवान गणेश जी की प्रतिमाओं का वितरण गणेश चतुर्थी के पूर्व होगा,तथा वितरण स्थान की शीघ्र ही जानकारी दी जायेगी अभी प्रतिमाएं बन रही है कुछ प्रतिमाएं बन चुकी है तथा इन पर रंग होना बाकी है।
