सागरI ऋषि विद्या और कृषि विद्या आधारित हमारी पारंपरिक प्रणाली के विकास एवं पुनर्जीवन से हम एक स्वस्थ मनुष्य, समाज और राष्ट्र की संकल्पना को साकार कर सकते हैं. उक्त उद्गार डॉ. सत्यनारायण यादव, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ, अर्चना योगायतन, नई दिल्ली ने डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के योग शिक्षा विभाग में आयोजित योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा समग्र स्वास्थ्य पर एक दिवसीय कार्यशाला में व्यक्त किएI डॉ. यादव ने कहा कि एलोपैथी से क्षणिक उपचार एवं लाभ मिलता है जबकि शरीर का निर्माण करने वाले प्राकृतिक तत्त्वों एवं प्रकृति से प्राप्त जड़ी बूटियों से ही वास्तविक स्वास्थ्य लाभ मिलता है. आजकल के दौर में रासायनिक उर्वरकों के अँधाधुँध प्रयोग से हमारी उपजाऊ भूमि, वायु एवं आहार रूप में धारण करने वाले शरीर तीनों का नुकसान हो रहा है. ऐसे दौर में हमें ऋषि विद्या और कृषि विद्या के प्रभावी एवं सामयिक उपयोग से स्वस्थ मनुष्य के निर्माण का प्रयास करना होगाI
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने कहा कि योग व सांख्य का दर्शन से गहरा संबंध है. दर्शनों के मूल में जो तत्त्व चिंतन है उसका आध्यात्मिक सैद्धांतिक पक्ष सांख्य है तो व्यवहारिक पक्ष योगशास्त्र है. मनुष्य अपार क्षमताओं का वाहक है परंतु अविद्या रूपी अज्ञान रूपी आवरण के कारण वह अपना वास्तविक स्वरूप नहीं पहचान पाता, अतः आधि व्याधि का शिकार होकर भोग विलास का जीवन जीकर चला जाना हैं ऐसे में योग विद्या और भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापक प्रचार प्रसार की आवश्यकता बढ़ जाती हैI
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. नितिन कोरपाल ने कहा कि प्राचीन काल से ऋषियों द्वारा अनुभूत प्रत्यक्ष ज्ञान के आधार पर अध्यात्म योग तथा आयुर्वेद की जो जीवन पद्धति विकसित की गई उसका आधुनिक काल में पर्याप्त हृास हुआ जिसके परिणाम स्वरूप मनुष्य का अधोपतन हुआ. आज हमें उन्ही प्राच्य विद्याओं की ओर वापिस लौटने की आवश्यकता महसूस हो रही है इसलिये योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की तरफ हमारा ध्यान बढ़ रहा है. स्वागत भाषण देते हुए डॉ. अरूण कुमार साव ने कहा कि योग शिक्षा का सभी विषयों से समन्वय एवं तालमेल हो सकता है. दर्शन एवं संस्कृत के अतिरिक्त आज चिकित्सा शास्त्र, मनोविज्ञान, मूल्य परक नैतिक शिक्षा एवं शिक्षा शास्त्र में योग विषय को लेकर शोध एवं नवाचार प्रारंभ हो चुका हैI
कार्यक्रम में इफको के स्थानीय फील्ड ऑफीसर प्रतीक गुप्ता ने कृषि में उर्वरकों के उपयोग को कम करते हुए नैनो उर्वरकों के उपयोगिता का पक्ष प्रस्तुत कियाI