सागर। स्वर संगम साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित गजलों का कार्यक्रम गुलदस्ता सरस्वती पुस्तकालय एवं वाचनालय के सभा भवन में रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और बीती शाम स्मृति शेष दुष्यंत कुमार एवं जगजीत सिंह की चुनिंदा गजलों से भरी महफिल में चार चांद लग गए और सभी श्रोता दर्शक लंबे समय तक उनकी गजलों का आनंद लेते रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्रहण की वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र रावत ने ।उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि यह संस्था लगातार 24 वर्षों से गुलदस्ता कार्यक्रम करती आ रही है, ऐसे आयोजनों के माध्यम से नगर के गजल प्रेमियों को अतुलनीय आनंद की प्राप्ति होती है। मुख्य आतिथ्य ग्रहण किया स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉक्टर अजय कुमार तिवारी ने। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसी गजलों के कार्यक्रम सागर में गजल प्रेमियों को संगीत की मधुर स्वर लहरियों से परिपूर्ण होकर सद्भावना एवं शांति का संदेश देते हैं।उन्होंने इस कार्यक्रम की अत्यधिक सराहना की।
विशिष्ट अतिथि थे सुकृत के संचालक डॉक्टर शैलेंद्र सिंह। उन्होंने भी अपनी बात संक्षिप्त में रखी और आयोजक संस्था अध्यक्ष हरी सिंह ठाकुर की अत्यधिक प्रशंसा की। विशिष्ट अतिथि कवि लक्ष्मी नारायण चौरसिया ने भी दुष्यंत कुमार को स्मरण किया। उन्होंने बताया कि विट्ठल भाई जी के यहां जब दुष्यंत जी आए थे तब कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ था उसमें मैं सम्मिलित था।उनसे मुलाकात हुई थी। संस्था अध्यक्ष हरीसिंह ठाकुर ने स्वर संगम का 46 वर्ष के सफरनामा पर प्रकाश डाला एवं गजलकार दुष्यंत कुमार व गजल गायक जगजीत सिंह जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का सफल संचालन मधुर उद्घोषिका श्रीमती स्वाति जैन ने किया। शुरुआत में सर्वप्रथम अतिथियों ने मां सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया। पं.जे के पाठक ने स्वस्तिवाचन एवं मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ करवाया। समस्त अतिथियों ने स्मृति शेष दुष्यंत कुमार व जगजीत सिंह जी के चित्रों पर माल्यार्पण कर उनका स्मरण किया।
द्वितीय चरण गजलों के कार्यक्रम गुलदस्ता का आगाज हुआ अर्चना प्यासी की गाई हुई मां सरस्वती वंदना से। और गजलों का जो दौर प्रारंभ हुआ तो उसने रुकने का नाम नहीं लिया। गजल गायक एवं अतिथि डॉ. शैलेंद्र सिंह जी ने भी जगजीत सिंह की गजल होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो एवं दुष्यंत कुमार की गजलें प्रस्तुत कीं जिसका दर्शकों ने करतल ध्वनि से जोरदार स्वागत किया।
गजल गायक जगदीश सागर ने कहां तो तय था चिरागां हर एक घर के लिए, दुष्यंत कुमार की इस ग़ज़ल से शुरुआत की जिसका दर्शकों ने खूब स्वागत किया। शिव रतन यादव द्वारा दुष्यंत कुमार की गजल मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूं वह गजल आपको सुनाता हूं ने भी वाहवाही लूटी। और सुप्रसिद्ध गज़ल गायक मितेंद्र सिंह सेंगर ने जब जगजीत सिंह की गजल आए हैं समझाने लोग हैं कितने दीवाने लोग एवं हुजूर आपका ऐहतेराम करता चलूं इधर से निकला था सलाम करता चलूं सुनाए तो दर्शकों द्वारा करतल ध्वनि से संपूर्ण हाल गूंजायमान हो गया। तबला पर शैलेंद्र राजपूत, सिंथेसाइजर पर अर्पित तिवारी, गिटार पर प्रियंक तैलंग ने साथ दिया जिसका दर्शकों ने करतल ध्वनि से जोरदार स्वागत किया।
फिर तो गजलों का दौर शुरू हुआ तो रुकने का नाम तक नहीं ले रहा था। यह गुलदस्ता कार्यक्रम अपनी ऊंचाइयों पर जा पहुंचा और सभी गजल गायकों की गजलों ने सतरंगी किरणें बिखेर दीं। अन्य वादक कलाकारों में कपिल सागर, देवेश सागर, रविराज, प्रियंक तैलंग और रमेश चौरसिया ने अपने-अपने संगीत का जादू बिखेरा। इस अवसर पर एकता समिति के चंपक भाई,कमल कुमार जैन एवं सदस्यों ने हरी सिंह ठाकुर (आयोजक) का सम्मान पत्र देकर पुष्पहार से स्वागत किया।
समस्त अतिथि एवं श्यामलम् अध्यक्ष उमाकांत मिश्र द्वारा सभी कलाकारों को शाल,श्रीफल, पुष्पहार एवं सम्मान राशि प्रदत्त कर सम्मानित किया गया। स्वागत कर्ताओं में उपेंद्र सिंह ठाकुर,सुभाष सराफ, शिखर चंद्र शिखर, अरविंद कुमार जैन पत्रकार, राघवेंद्र नायक आदि प्रमुख रहे।
इस तरह यह गुलदस्ता कार्यक्रम खुशी के माहौल में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच रात होने तक चलता रहा और अपनी यादें छोड़ गया। अंत में आभार प्रदर्शन किया संस्था अध्यक्ष हरीसिंह ठाकुर ने।
इस कार्यक्रम में आरके तिवारी, टी आर त्रिपाठी,पी आर मलैया,राजेश शास्त्री, पैट्रिस फुस्केले,अंबिका यादव, सुबोध मलैया, देवकी रावत, मणिदेव सिंह, अमित आठिया, अरविंद हर्डिकर, मुकेश निराला, केएल तिवारी, दिनेश साहू, महेंद्र खरे,पूरन सिंह राजपूत, क्रांति जबलपुरी,उमाशंकर रावत, रविंद्र दुबे कक्का, बिहारी सागर, सीएल कंवल, डॉ. रामरतन पांडे,ऋषभ समैया, असीम दत्त दुबे, प्रभात कटारे, डॉ.जी एल दुबे,राजीव अग्निहोत्री एड. दीपक देउस्कर, रमेश दुबे,सहित शहर के अनेक साहित्यकार, संगीत रसिक तथा गणमान्य जन अत्यधिक संख्या में उपस्थित थे।