जन्म तिथि और पुण्यतिथि केवल आयोजन तक ही सीमित नहीं होना चाहियेः- प्रो. मिश्रा
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सागर I रानी अवन्तीबाई लोधी विश्वविद्यालय सागर में वीरांगना रानी अवन्तीबाई लोधी की पुण्यतिथि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शुभारंभ रानी अवन्तीबाई लोधी के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. विनोद कुमार मिश्रा ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्‌द्योधन में रानी अवन्तीबाई लोधी के पराक्रम, साहस, वीरता और देश भक्ति की भावना से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जन्म तिथि और पुण्यतिथि केवल आयोजन तक ही सीमित नहीं होना चाहिये बल्कि उनके जीवन संघर्ष और योगदान को जानना चाहिये और उनसे प्रेरणा भी लेना चाहिये। उन्होंने केन्द्र सरकार को बधाई देते हुए 75वें अमृतकाल में विस्मृत वीरांगनाओं और विभूतियों को याद करना सार्थक और प्रेरणादायी बताया।

कुलसचिव प्रो. शक्ति जैन ने विश्वविद्यालय की स्थापना में मध्य प्रदेश शासन के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव  विधायक श्री शैलेन्द्र जैन  सहित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के योगदान को स्मरण किया तथा रानी अवंतीबाई के बलिदान को गौरवपूर्ण बताया। सहायक कुलसचिव पंचम सनौडिया ने रानी अवन्तीबाई लोधी के स्वतंत्रता आंदोलन एवं उनके ऐतिहासिक योगदान पर प्रकाश डाला। विश्वविद्यालय के वित्ताधिकारी अभयराज शर्मा ने रानी अवन्तीबाई लोधी के जीवन से जुड़ी विभिन्न घटनाओं और उनके ऐतिहासिक पक्ष को रेखांकित किया। प्रो. रेनूबाला शर्मा ने उनके बलिदान और समर्पण से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। प्रो. रजनी दुबे ने कहा कि यदि हमें सूर्य की तरह चमकना है तो सूर्य की तरह तपना भी होगा। डॉ उदित मलैया ने संक्षिप्त जीवनी प्रस्तुत की। डॉ. सिद्धि त्रिपाठी ने रानी अवंतीबाई लोधी के बलिदान और सामाजिक, राजनैतिक संघर्ष व योगदान पर अपने विचार रखे। डॉ. श्रद्धा सोलंकी ने रानी अवंतीबाई के सामाजिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पक्ष पर विचार रखे। डॉ. दिनेश अहिवार ने रानी अवन्तीबाई लोधी के साहस, वीरता, देशभक्ति और राष्ट्र प्रेम की भावना को अनुकरणीय बताते हुए उनके जीवन पर केन्द्रित कविता का वाचन किया। विद्याथी संजय अहिरवार ने कविता का पाठ किया एवं अभय राजपूत ने गीत की संगीतमय प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अल्का पुष्प निशा ने किया तथा डॉ. मिथलेश शरण चौबे ने आभार व्यक्त किया। उक्त कार्यक्रम में सहायक कुलसचिवअमन अग्रवाल, डॉ. एम. के. मिश्र, डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, डॉ. मुकेश अहिरवार, डॉ. भावना पटैल, डॉ. स्वर्णलता तिवारी, डॉ. पूर्वी जैन, डॉ. ब्रजेश रिछारिया, डॉ. चंदन सिंह, डॉ. सिम्मी मोदी, डॉ. प्रिया सिंह, आर्यन सिंह राजपूत, शीतल सोनी सहित विश्वविद्यालय के कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।


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