IMG 20240911 WA0007
शेयर करें

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से किया गया था आयोजन

सागर । अन्वेषण थिएटर ग्रुप का त्रिदिवसीय नाट्य समारोह 10 सितंबर की शाम सागर के रवीन्द्र भवन में भोपाल से आए नवनृत्य नाट्य संस्था के कलाकारों द्वारा ‘सोते रहो’ नाटक के मंचन के साथ ही समाप्त हो गया। प्रेम जनमेजय द्वारा लिखित नाटक का निर्देशन तरुणदत्त पाण्डेय ने किया।
‘सोते रहो’ नाटक में विभिन्न दृश्यों के माध्यम से आज के भ्रष्टाचार, बेईमानी, लालच, सरकारी तंत्र के ज़िम्मेदार लोगों का इसमें लिप्त होना, बेईमानी में आपादमस्तक लिप्त होकर नई गाड़ियां, विलासिता पूर्ण जीवन, शराब की पार्टियां करना और इस सब को खुली आंखों से देखते हुए सबका सोते रहना जैसी कड़वी सच्चाई को हास्य-व्यंग्य के माध्यम से दिखाया गया। नाटक के निर्देशक तरुणदत्त पाण्डेय बताते हैं कि सोते रहो नाम से ही समझ आता है कि आसपास कुछ भी होता रहे पर कुंभकरण की तरह सोते रहो। श्री प्रेम जनमेजय द्वारा लिखित इस व्यंग में समाज के उन सेवकों के बारे में दर्शाया गया है जो आंखें तो खुली रखते हैं पर फिर भी सो रहे हैं।

1000296997

अपना काम निकालने के लिए जागते हुए भी अपनी आंखें बंद रखते हैं। यहां तक कि धन दौलत के नशे में अपनों तक को भूल जाते हैं। इन्हीं बुराईयों पर कटाक्ष करते हुए यह नाटक गढ़ा गया है। इस नाटक में मंच पर जिन कलाकारों ने अपने अभिनय का जलवा बिखेरा उनमें मंजीत के रोल में योगेश कुमार उमाठे, सतवंत की भूमिका में भावना बहल, बंटी के चरित्र में आदित्य शुक्ला, महादेवन के रूप में बलराम ओझा, कल्याणी की भूमिका में सुनीता अहिरे, बेनर्जी की भूमिका में सुशोभन पांजा, जयश्री की भूमिका में अंजना राय और पुलिस की भूमिका में भीमराव राउत शामिल रहे। मंच परे के कलाकारों में मंच परिकल्पना में नीतेश मिश्रा, मंच निर्माण में निधि दुबे और हर्षिता मिश्रा, रूपसज्जा में स्नेहा खेर और मोहिनी कीर, वेशभूषा में श्वेता पाण्डेय और गुंजा उमाठे, देहगति में श्वेता वर्मा, संगीत संचालन में सुनंदा कीर, प्रकाश परिकल्पना में मुकेश जिज्ञासी, प्रस्तुति प्रबंधन में अंकुर वर्मा और शिखा जैन ने अपने दायित्वों का भलीभांति निर्वहन किया। परिकल्पना एवं निर्देशन तरुणदत्त पाण्डेय का रहा। कलाकारों के बेहतरीन अभिनय ने नाटक की ऊंचाई को शुरू से अंत तक बरकरार रखा। दर्शकों ने भी दृश्यानुसार तालियों और ठहाकों की प्रतिक्रिया से कलाकारों को नवाज़ा व उनकी भूरि-भूरि सराहना की। नाटक के अंत में पात्र परिचय के साथ ही आयोजक संस्था अन्वेषण थिएटर ग्रुप की ओर से अध्यक्ष रवीन्द्र दुबे ‘कक्का’ ने पुष्पगुच्छ व स्मृति चिन्ह भेंट कर नाटक के निर्देशक तरुणदत्त पाण्डेय व भोपाल से आये नाट्यदल का अभिनंदन किया। अंत में अन्वेषण की ओर से सभी दर्शकों, दमोह व भोपाल से पधारे नाट्यदलों एवं समारोह के सभी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुये तीन-दिवसीय नाट्य समारोह के समापन की घोषणा की गई। नाटक के प्रदर्शन के दौरान रवीन्द्र भवन में नगर विधायक शैलेन्द्र जैन, पूर्व सांसद राजबहादुर सिंह, उमाकांत मिश्र, अंबिका यादव के साथ ही बड़ी संख्या में सागर नगर व आसपास क्षेत्रों के नाट्य दर्शक उपस्थित रहे।


शेयर करें
advertisment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!