बनारस या हरिद्वार नहीं, ये सागर में लाखा बंजारा झील किनारे घाट पर गंगा आरती का नजारा है
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ज्योति शर्मा/सागर । सोमवार को सागर में लाखा बंजारा झील किनारे गंगा आरती का नजारा बनारस और हरिद्वार में की जाने वाली गंगा आरती से कम न था। संध्याकालीन समय दिन ढलने से पहले लाखा बंजारा झील के पानी में ऐसी लहरे उठ रहीं थीं मानो स्वयं गंगा जी की लहरें हों। झील किनारे उपस्थित सभी देखने वाले अचमभित थे। नागरिकों ने लहरों के वीडियो भी बनाये। दिन ढलने के बाद शाम के समय आरती प्रारम्भ होते ही घाट पर पैर रखने के लिये जगह न थी। महिलाओं बच्चों, बुजुर्ग और युवाओं सहित बड़ी संख्या में नागरिकों सहित आगनतुक आरती में शामिल हुये।ढपला-रमतुला, ढोल-नगाड़े की धुन और उज्जैन के डमरू दल की जोरदार आवाज़ के बीच गंगा आरती प्रारम्भ की गई। पुजारीयों ने आरती के दौरान शंख की ध्वनि से वातावरण में ऊर्जा का संचार कर सभी को आरती का संकेत दिया। धूप, गूगल, शुद्ध घी आदि के सुगंधित धुएँ ने वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर सुगंधित किया। नागरिकों ने हर्ष-उल्लास के साथ इस आयोजन में शामिल होकर इसे यादगार बनाया।

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चकराघाट से गणेशघाट तक 400 मीटर में फैले विशाल घाट पर कई हजार श्रद्धालु नगरवासियों सहित दूर-दूर से गंगा आरती देखने आये आगनतुक दोपहर 3 बजे से आरती का इंतजार करते हुये विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आंनद ले रहे थे। नगर निगम आयुक्त सह कार्यकारी निदेशक सागर स्मार्ट सिटी राजकुमार खत्री के निर्देश पर की गई गंगा आरती की विभिन्न तैयारियों में झील किनारे चकराघाट से प्रारम्भ पहली बड़ी छतरी पर लोकनृत्य बरेदी व शेर नृत्य की प्रस्तुति, दूसरी छतरी पर सपेरा जाति समूह का विश्वप्रसिद्ध कालबेलिया नृत्य, नौरता नृत्य, तीसरी छतरी पर बधाई लोकनृत्य, चौथी छतरी पर शहनाई की धुन आगंतुकों को आकर्षित कर रही थी। अष्टसखी जी मंदिर के पास बने गजीवो पर कृष्णलीला रास की प्रस्तुति देखकर दर्शक मोहित होकर स्तब्ध दिखे। नवग्रह मंडपम और अष्टसखी मंदिर के बीच बने मंच पर जयपुर के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय तंत्र वाद्ययंत्र सितार, संतुर आदि से गानों की धुन ने ऐसा समा बांधा की देखने वाले झूमने लगे। नवग्रह मंडपम से विट्ठल मंदिर की ओर बने मंच पर प्रसिद्ध ढिमरयाई गायक चुन्नीलाल और उनकी टीम ने समा बांधा और दर्शकों को अपनी ओर खींचा। झील किनारे ऐतिहासिक घाटों का सुंदर कायाकल्प अनेक स्थानीय कलाकारों को एक समृद्ध मंच प्रदान कर रहा है। सोमवार की यह प्रस्तुति कलाकारों को एक माला में पिरोने का कार्य कर रही थी।

लाखा बंजारा झील के लोकार्पण के उपलक्ष्य में गंगा आरती के भव्य और दिव्य आयोजन को विशेष बनाने के लिये महाकाल मंदिर उज्जैन की तर्ज पर नवग्रह मंडपम के सामने बने गंगा आरती मंच पर शिवलिंग विग्रह को सजाकर विधीविधान से पूजन आदि किया गया। आकर्षक लाइटिंग से सजी झील के किनारे 11 पूजारियों द्वारा वैदिक मन्त्रोंच्चार कर 21 दीपक वाली विशाल आरती, गूगल, धूप, कपूर आदि से अलग-अलग आरती की गई। गंगा आरती में बड़ी संख्या में शामिल श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाते हुये श्रद्धा पूर्वक आरती में शामिल होकर धर्मलाभ लिया। आरती के बाद प्रसाद वितरण होने के बाद देर रात तक आकर्षक झील के नजारे देखने के लिये घाट पर नागरिकों का आना जाना लगा रहा।

झील किनारे सभी घाटों पर दीपदान हेतु 5100 दीपकों की विशेष व्यवस्था की गई

सागर की झील किनारे अगस्त माह से प्रति सोमवार को आयोजित हो रही गंगा आरती में झील की लहरों पर दीपदान की परम्परा चली आ रही है। झील कायाकल्प कार्यों के लोकार्पण पर आयोजित गंगा आरती में विशेष आयोजन करते हुये झील किनारे चारों ओर बने घाटों से दीपदान करने के लिये आंटे से 5100 दीपकों का निर्माण किया गया और छियोल पत्ते से बने दोनों में रखकर सभी घाटों पर कतार में सजाया गया। आरती के पहले ही कुछ महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों ने उत्साह और श्रद्धा के साथ दीपदान करना प्रारम्भ कर दिया था। आरती के दौरान एक साथ सभी घाटों से दीपदान किया गया और झिलमिल दीपकों को झील की लहरों पर छोड़ा गया।


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