एंटीबायोटिक अवेयरनेस दिवस
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सागर I 4 साल की सीमा को बुखार आने पर उसकी मां रेखा ने पिता रमेश को बताया। पिता रमेश ने तुरंत उसको घर में रखी हुई एक गोली के टुकड़े यह कहते हुए खिला दिया कि इसको हर बार यही दवाई खाने से आराम पड़ जाता है। सीमा रात भर परेशान रही और उसको आराम नहीं हुआ। सुबह जब वह उठी तो उसके शरीर पर अनेक लाल रंग के दाने उभर आए थे और बुखार भी तेज हो गया था।  मां रेखा और रमेश उसे मेडिकल कॉलेज बीएमसी में विशेषज्ञ के पास दिखाने ले गए । डॉक्टर ने सीमा की जांच करते हुए सब जानकारी पूछी और बताया की बच्चों को आपके द्वारा दी गई एंटीबायोटिक दवा से नुकसान हुआ है। यह सुनकर सीमा की मां और रमेश एक दूसरे का मुंह देखने लगे और बोले कि इसको तो हर बार इसी दवाई से आराम पड़ जाता है।

इस पर डॉक्टर ने समझाया की एंटीबायोटिक का उपयोग सेहत के लिए बहुत अच्छा नहीं होता और बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक नहीं लेना चाहिए कभी भी घर में रखी हुई एंटीबायोटिक का इस्तेमाल अपने दिमाग से नहीं करना चाहिए। अधिकतर बुखार या किसी सामान्य लक्षण के लिए लोग खुद ही मेडिकल स्टोर से या किसी डॉक्टर के द्वारा पहले लिखी गई दवाई इस्तेमाल कर लेते हैं। यह अच्छी बात नहीं है। यह मौका था बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के परिसर में फाइनल ईयर एमबीबीएस स्टूडेंट्स के द्वारा किए गए एक नुक्कड़ नाटक का जिसमें एंटीबायोटिक से होने वाले दुष्प्रभाव एवं एंटीबायोटिक का इस्तेमाल किस तरीके से फायदेमंद होने के साथ-साथ नुकसानदायक भी है यह समझाने का प्रयास किया गया। इस मौके पर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के दिन डॉक्टर पीएस ठाकुर, आई ए पी प्रेसिडेंट एवं बाल एवं शिशु रोग विभाग अध्यक्ष डॉक्टर शालिनी हजेला, डॉक्टर आशीष जैन, डॉक्टर अजीत असाटी, डॉ रूपा अग्रवाल, डॉ अंकित जैन, डॉ महेंद्र सिंह चौहान एवं आई.ए.पी. सागर सेक्रेटरी डॉ बृजेश यादव के साथ समस्त स्टाफ एवं भारी मात्रा में मरीजों की परिजन मौजूद थे।


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