सागर I जिला चिकित्सालय में बेहतर हुए चिकित्सकीय इंतजामों एवं सुविधाओं से राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक(एनक्यूएएस) प्रमाणीकरण में 92.90 प्रतिशत स्कोर के साथ सागर जिला चिकित्सालय ने प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया है। सरकारी अस्पतालों में स्वास्थय सेवा व आधारभूत संरचनाओं जैसे मरीजों के अधिकार, उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाएं, इनपुट, सपोर्ट सर्विसेज, क्लिनिकल सर्विसेज, इन्फेक्शन कंट्रोल, आउटकम और गुणवत्ता प्रबंधन आदि का एक मानक निर्धारित है।
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की टीम निर्धारित मानकों के साथ-साथ मरीजों व नागरिकों के फीडबैक के आधार पर अस्पतालों का मूल्यांकन करती है। एनक्यूएएस के कड़े मानकों पर खरा उतरने वाले अस्पतालों को प्रमाणपत्र व फंड उपलब्ध कराया जाता है।
राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के अनुरूप सागर जिला चिकित्सालय में मरीजों को जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता के साथ-साथ इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार करते हुए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के प्रयास कलेक्टर दीपक आर्य सह अध्यक्ष सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मार्गदर्शन में सतत् रूप से किये जा रहे हैं। महिलाओं एवं बच्चों सहित सभी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ ही आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के उददेश्य से स्मार्ट सिटीज मिशन अंतर्गत सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के माध्यम से जिला चिकित्सालय परिसर और भवन में मूलभूत सुविधाओं में आवश्यक विकासकार्य कर सुधार किया गया है।
स्मार्ट सिटी द्वारा जिला चिकित्सालय परिसर में नवनिर्मित सर्वसुविधायुक्त ओपीडी रजिस्ट्रेशन एवं वेटिंग लॉबी से इन्फेक्शन कंट्रोल में महत्वपूर्ण सहयोग मिला है। यहां मरीजों व उनके परिजनों हेतु पर्याप्त बैठक व्यवस्था उपलब्ध है। महिलाओं/पुरूषों के लिए अलग-अलग रजिस्ट्रेशन काउंटर एवं टॉयलेट सुविधाओं का विकास किया गया है। मरीज इलाज के बाद सुलभता से दवाएं प्राप्त कर सकें इसके लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल दवा वितरण काउंटर का निर्माण किया गया है। बुजुर्ग एवं दिव्यांग जन हेतु विशेष सुविधाएं मुहैया कराई गयी हैं।

जिला चिकित्सालय के पुराने भवन में वॉटरप्रूफिंग व स्ट्रेंथिग कार्य से दुर्घटनाओं की संभावनाओं को समाप्त किया गया। इससे मरीजों को सीपेज मुक्त वार्डों व डोरमेटरी का लाभ मिल रहा है। एक सुरक्षित व स्वास्थ्य वातावरण में मरीजों का इलाज सुनिश्चित करने हेतु चिकित्सालय भवन में पुराने बिजली के तार व बिजली के कनेक्शन आदि को बदल कर इलेक्ट्रिकल सिस्टम सुधार, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, मरीजों के निर्बाध आवागमन और स्ट्रेचर आदि को सुगमता से लाने ले जाने को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित फ्लोरिंग, टाइल्स, ग्रेनाईट कार्य, अस्पताल में वार्डों व गैलरियों आदि की दीवारों को सुंदर खुशनुमा बनाने के लिए पुट्टी व कलर आदि कार्य स्वास्थय विभाग की गाईडलाइन व मानकों के अनुरूप किया गया।
बच्चों के वार्ड को दीवार पर कलाकृति बनाकर खुशनुमा बनाने का प्रयास किया गया है। जिससे बच्चे इलाज के दौरान बेहतर महसूस करें। मरीजों को हाइजीनिक व हैल्दी फूड उपलब्ध हो इस उद्देश्य से सर्वसुविधाओं के साथ किचिन का निर्माण किया गया। विभिन्न वार्डों में बने टॉयलेट्स की सुविधाओं में सुधार के साथ ही नये टॉयलेट्स का निर्माण किया गया जिससे मरीजों को साफ-स्वच्छ टायलेट सुविधाएं मुहैया हो सकीं हैं। परिसर में स्टोर रूम की तरह इस्तेमाल हो रहे कमरों, स्थलों व मैदानों का पुनर्विकास कर उन्हें मरीजों हेतु उपयोगी बनाया गया जिससे अधिक जगह और खुला वातावरण मरीजों हेतु उपलब्ध हुआ है। इसके साथ ही एक्सरे रूम, लेबोरेटरीज आदि अन्य विभिन्न आवश्यक आधारभूत सुविधाओं को सुद्रढ़ बनाये जाने से मरीजों को बेहतर सुविधाओं का लाभ मिला है।
