स्वामी विवेकानंद
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11/9 को आतंकवादी हमले नहीं शिकागो भाषण के रूप में स्मरण रखें : डॉ. आनंद तिवारी

ज्योति शर्मा/सागर । स्वामी विवेकानंद जी द्वारा अमेरिका के शिकागो में वर्ष 11 सितम्बर 1893 में विश्वधर्म सम्मेलन में दिए गए ऐतिहासिक भाषण के उपलक्ष्य में विवेकानंद केंद्र सागर द्वारा विश्वबंधुत्व दिवस पर व्याख्यानमाला कार्यक्रम  आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जलन एवं स्वामी विवेकानंद और भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। शासकीय कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी ने कहा कि हमें 11/9 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमले के रुप में नहीं वरन् शिकागो दिवस के रूप में स्मरण रखना चाहिए। आतंकवाद पर मानवता सदैव भारी रहती है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के अनेक प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी चारित्रिक दृढ़ता, उच्च मनोबल, कुशाग्र बुद्धि, जिज्ञासु स्वभाव, निर्भीकता ऐसे सद्गुण हैं जिन्हें प्रत्येक युवा को आत्मसात करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद की वाणी में ऐसा आकर्षण और सम्मोहन था कि उनके पांच शब्दों के उच्चारण से ही तीन मिनट तक तालियां बजती रहीं। स्वामी जी के उद्बोधन से वैश्विक परिदृश्य में भारत की एक ऐसी छवि अंकित हुई जिसने हमें भारतीय होने का गौरव-बोध कराया। स्वामी जी की विश्व बंधुत्व की परिकल्पना को साकार करते ही भारत पुनः विश्वगुरु के सिंहासन पर सुशोभित हो जाएगा।

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मुख्य अतिथि जिला न्यायाधीश दिनेश सिंह राणा ने कहा कि हमें संस्कारों की शुरुआत अपने परिवार से करना होगी। प्राथमिक स्तर पर जितने बालकों को हम स्वामी विवेकानंद और भारतीय संस्कृति से परिचित करा पाएंगे तो हमारा प्रकल्प सफल होगा। किशोर और युवा पीढ़ी मोबाइल की चपेट में आती जा रही है। उसे सद साहित्य की ओर मोड़ना उनकी ऊर्जा को सही दिशा देना हमारा नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि सच्चे अर्थ में हमारा जो कर्म है वहीं धर्म भी है। हमें एक कर्मशील, चौतन्य शील और विवेकशील समाज की रचना करना है जिसमें स्वामी विवेकानंद एक प्रेरणा पुंज के रूप में हमारे दिग्दर्शक हैं। उन्होंने बंधुत्व की जो राह दिखाई है वही समय की जरूरत है।

महिलाओं को निर्भीकता से जीवन जीने का वातावरण हम मुहैया नहीं करा सकते तब तक भला हम स्वामी जी के सपनों का भारत कैसे बना सकते हैं

विशिष्ट अतिथि सागर संभाग, जनसम्पर्क विभाग की सहायक संचालक सौम्या समैया ने कहा कि जब तक महिलाओं को निर्भीकता और स्वतंत्रता से अपना जीवन जीने का वातावरण हम मुहैया नहीं करा सकते तब तक भला हम स्वामी जी के सपनों का भारत कैसे बना सकते हैं। उन्होंने कोलकाता और निर्भया जैसे जघन्य अपराधों पर चिंता जताते हुए महिला सुरक्षा और आत्मसम्मान पर केंद्रित एक उत्कृष्ट कविता बेखौफ आज़ाद है जीना मुझे के माध्यम से भी अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व पुलिस उप अधीक्षक इंद्रराज ने कहा की मत- मतांतर सभी धर्मों में रहे हैं। सनातन, इस्लाम, क्रिश्चियन, बौद्ध, जैन, सिख सभी में अनेक धाराएं प्रफुस्टित होती रही हैं। इसका यह अर्थ नहीं कि हम एक दूसरे के विरोधी या शत्रु बन जाएं। स्वामी विवेकानंद हमें सिखाते हैं कि इन सभी को साथ लेकर विश्व बंधुत्व की भावना को न सिर्फ कायम रखना है वरन उसे आगे बढ़ाना है।

कार्यक्रम में संस्कार वर्ग के अंगद सिंह बघेल ने तीन ओंकार प्रार्थना, स्वागत उद्बोधन केंद्र प्रशिक्षण प्रमुख डॉ. जीएल दुबे ने, अतिथि परिचय नगर प्रमुख चंद्रप्रकाश शुक्ला ने, केंद्र परिचय भोपाल विभाग संपर्क प्रमुख नीलरतन पात्रा  ने, गीत कार्यपद्धति प्रमुख गौरव सिंह राजपूत ने, विवेक वाणी संस्कार वर्ग के अनमोल दुबे ने, कार्यक्रम का संचालन नगर संचालक  धर्मेन्द्र शर्मा ने और आभार प्रदर्शन संपर्क प्रमुख डॉ आशीष द्विवेदी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर जन अभियान परिषद के संभाग समन्वयक श्री दिनेश उमरिया, जिला समन्वयक केके मिश्रा, श्यामलम के उमाकांत मिश्र, विश्वहिंदू परिषद के अजय दुबे, डॉ प्रदीप शुक्ला आदि केंद्र के कार्यकर्त्ता, नगर के समाजसेवी, प्रबुद्ध व्यक्ति उपस्थित रहे।


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