स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों को अपने स्वाभिमान की तरह जीवन में उतारना चाहिए
सागर। डॉ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर के दर्शनशास्त्र विभाग में स्वामी विवेकानन्द जयंती पर राष्ट्रीय युवा दिवस समारोह एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अर्चना वर्मा ने कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों का स्वागत किया एवं कार्यक्रम की संरचना का विवरण प्रस्तुत किया । उन्होंने स्वामी विवेकानन्द के विचारों को आत्मसात करने और उन्हें अपने चरित्र का हिस्सा बनाने के लिए सभी को प्रोत्साहित किया। विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार तिवारी ने सभी आगंतुको को युवा दिवस की बधाई दी एवं अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने विवेकानन्द के विचारों में आध्यात्म और समाज के समन्वय पर बल दिया।


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सेन्टर फॉर फिलॉसफी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. ए. नटराजू, ने स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों और मूल ग्रन्थों के अध्ययन की महत्ता पर चर्चा की। उन्होंने सभी को विवेकानन्द के साहित्य को पढ़ने के लिए प्रेरित किया. कार्यक्रम के दौरान अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में दर्शनशास्र विभाग के वरिष्ठ आचार्य प्रो. अम्बिकादत्त शर्मा ने ‘आत्मनं सिद्धि’ के रूप में भारतीय ज्ञान-परम्परा की विशिष्टता को उजागर करते हुए अन्य अंतरराष्ट्रीय परम्पराओं से इसकी श्रेष्ठता को विवेचित किया। प्रो. शर्मा ने कहा कि हमें स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों को अपने स्वाभिमान की तरह जीवन में उतारना चाहिए। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सहसंयोजक डॉ. देवस्मिता चक्रवर्ती ने स्वामी विवेकानन्द के नारी सशक्तिकरण के दृष्टिकोण पर चर्चा की। भाषण प्रतियोगिता के निर्णायक दर्शनशास्त्र विभाग के डॉ. नरेन्द्र कुमार बौद्ध, डॉ. अर्चना वर्मा एवं डॉ. देवस्मिता चक्रवर्ती थे।
इस अवसर पर विभाग में आयोजित भाषण प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया. प्रथम स्थान पर अथर्व मिश्रा, वैष्णवी राठौर, मुस्कान कौरव, द्वितीय स्थान आलोकदेव पाण्डेय, तृतीय स्थान पर सौम्या शर्मा, प्रियांशी राठौर एवं अमित तिवारी रहे. कार्यक्रम संचालन दर्शनशास्त्र विभाग के शोधार्थी अक्षरा सिंघई, विभा पाण्डेय, शिव कुमार यादव एवं गौरव कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में राजनीति एवं लोकप्रशासन विभाग से डॉ. दिवाकर कुमार झा एवं डॉ. निकिता जायसवाल शामिल हुए।