सागर मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय, भोपाल एवं संस्कृति परिषद डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के संयुक्त तत्वावधान में ‘बुंदेलखंड भ्रमणशील कार्यशाला’ का आयोजन दिनांक 7 जून से 14 जून 2024 तक डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर ( मध्यप्रदेश)में किया गया। कार्यशाला प्रतिदिवस 4 चरणों में संचालित हुई। इस आयोजन पर कुलपति प्रो नीलिमा गुप्ता ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों संस्थाओं के विद्यार्थियों के संगम से एक दूसरे को सीखने का अवसर मिला है। इससे दोनों संस्थाएं एवं विद्यार्थी लाभान्वित हुए। भविष्य में भी ऐसी साझेदारी अन्य सांस्कृतिक संस्थाओं से की जाएगी।
आयोजन के प्रथम चरण में नाट्य विद्यालय के छात्रों को क्षेत्रीय संस्था श्री कृष्ण संस्कृतिक विकास संस्थान समिति द्वारा बुंदेली लोक नृत्यों का प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें बुंदेलखंड के लोक नृत्य में प्रमुख रूप से बधाई नृत्य, नौरता नृत्य, बरेदी नृत्य, जावरा नृत्य का प्रशिक्षण छात्रों ने प्राप्त किया। दूसरे चरण में बुन्देलखण्ड की लोक संस्कृति पर विद्वनों द्वारा व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न विषयों पर विभिन्न विद्वनों ने छात्रों के समक्ष अपना व्यख्यान दियाI

बुदेली लोक सांस्कृतिक धरोहर इसके संरक्षण व सवर्धन में रंगमंच की भूमिका विषय पर पंकज तिवारी , बुंदेली लोकगीत पारंपरिक गीतों एवं सोलह संस्कारों से संबंधित गीतों का लोक जीवन से अन्तर्सम्बन्ध, उनका महत्व एवं गायकी” विषय पर शिवरतन यादव, बुंदेली लोक संगीत में प्रयुक्त होने वाले लोक वाद्य यंत्र उनका इतिहास और महत्व विषय पर डॉ. ललित मोहन, बुंदेली लोक नाट्य-स्वांग, लोक नाट्य स्वांग का इसिहास, शैली एवं वर्तमान स्वरूप एवं सैद्धांतिक व व्यवहारिक पक्ष विषय पर डॉ संतोष साहू, बुंदेली लोक गाथा जानकारी एवं प्रदर्शन पर व्याख्यान ओम प्रकाश चौबे, बुंदेली लोक साहित्य (गद्य और पद्य) पर संवाद सत्र में डॉ राजेन्द्र यादव, बुंदेलखंड और रंगमंच” पर व्याख्यान डॉ. राकेश सोनी, कहानी लेखन एवम उसके महत्त्व विषय पर डॉ. आशुतोष मिश्रा, बुन्देखण्ड के नाट्य और लोक नाट्य विषय पर राजेन्द्र दुबे द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत किया गया।
जिसमें विद्यार्थियों को बुन्देलखंड की लोक संस्कृति और लोक जीवन को समझने का मौका मिला। तीसरे चरण में प्रतिदिन प्रोडक्शन क्लास संजय श्रीवास्तव द्वारा की गई जो अगले महीने नाट्य विद्यालय द्वारा आयोजित नाटक की तैयारी का हिस्सा है। नाटक का निर्देशन संजय श्रीवास्तव द्वारा किया जा रहा हैं। चौथे चरण में लोक कलाओं अवलोकन छात्रों द्वारा किया गया जिसमें स्वांग संतोष पाण्डेय एवं दल द्वारा, बधाई जुगल नामदेव एवं दल, नौरता धुवा नामदेव एवं दल, ग्राम भ्रमण करवाये जाने हेतु शुभम पाण्डेय एवं दल, ढिमराई लीलाधर रायकवार एवं दल, बरेदी श्रीकृष्ण लोक सांस्कृतिक विकास संस्थान समिति, लोकगीत कावेरी प्रजापति एवं दल, राई नृत्य का अवलोकन रामसहाय पाण्डेय एवं दल द्वारा प्रस्तुत किया गया। आयोजन के स्थानीय समन्वयक डॉ राकेश सोनी रहे।
