साइकिल
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सागर ।प्रादेशिक सेना (टीए) ने राष्ट्र के प्रति समर्पित सेवा के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इस ऐतिहासिक अभियान का आयोजन किया है। दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर की दुर्गम भूमि और बर्फीली चोटियों से शुरू हुआ यह अभियान सबसे चुनौतीपूर्ण और विविध परिस्थितियों से होकर गुजरा है और भारत के सबसे दक्षिणी छोर इंदिरा पॉइंट (अंडमान और निकोबार) तक के इस अभियान में जंहा भारत के सबसे दक्षिनी सिरे पर तिरंगा फहराया जाएगा। साइकिलिंग के अलावा, नौकायान और स्कूचा डाइविंग जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। अभियान दल जम्मू-कश्मीर के सियाचिन बेस कैंप से मनाली, चंडीगढ़, दिल्ली, आगरा,और ग्वालियर जिला से होते हुए 1830 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद सागर पहुंचा।

प्रादेशिक सेना की प्लेटिनम जयंती के अवसर पर साइकिल अभियान के टीम शाम सागर आर्मी कैंट में पहुंचने पर सेंटर कमांडेंट ब्रिगेडियर इंद्रजीत सिंह भल्ला, विशिष्ट सेवा पदक,ने जवानों का स्वागत किया । साइकिलिंग अभियान के 31 वे दिन तारीख 29 अगस्त 2024गुरुवार सुबह 36 इंफेट्री डिवीज़न के कमांडर मजर जनरल के टी जी कृष्णन, सेना मेडल, विशिष्ट सेवा पदक ने झंडी देकर अपने गनतव्या स्थान के लिए रवाना किया गया। और सभी रैंको की ओर से दल को आगे की यात्रा के लिए शुभकामनायें दीं।

मेजर अभिनव रावत के नेतृत्व में साइकिल चालकों की टीम में विभिन्न इकाइयों से 02 अधिकारी, 02 जूनियर कमीशन अधिकारी और 16 जवान शामिल हैं, जो भारतीय सेना की अदम्य भावना को दर्शाते हुए, चरम मौसम की स्थिति, ऊबड़-खाबड़ इलाकों और चुनौतीपूर्ण ऊंचाइयों का सामना कर रहे हैं। अपनी उत्साही यात्रा के दौरान, टीम ने स्थानीय लोगों, पूर्व सैनिकों, भारतीय सेना के दिग्गजों और युद्ध नायकों के परिवारों के साथ बातचीत की। इसके अलावा, उन्होंने युवाओं को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करने, साहसिक भावना को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को उजागर करने के लिए वृक्षारोपण करने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ भी की है।


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