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सागर । युवा शक्ति ही राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति है। युवाओं को किसी भी देश की रीढ़ माना जाता है, उनका जोश, उत्साह, विचारशीलता और नवाचार की क्षमता ही किसी राष्ट्र को विकास की ऊँचाईयों तक ले जाता है। इसी सोच को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 12 अगस्त को “अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस’ (International Youth Day) मनाया जाता है। यह दिन वैश्विक स्तर पर युवाओं के योगदान को सराहने, उनकी समस्याओं पर विचार करने एवं उनके भविष्य को उज्जवल बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए मनाया जाता है। युवा, देश का भविष्य होते है एवं उनके सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और नेतृत्व को बढ़ावा देना, समाज के समग्र विकास हेतु अत्यन्त आवश्यक है।

1999 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNO) ने 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में घोषित किया था। इसका सुझाव सर्वप्रथम 1998 में लिस्बन (पुर्तगाल) में हुये विश्व युवा सम्मेलन में दिया गया था। इसके तत्पश्चात् प्रतिवर्ष यह दिवस युवाओं के सम्मान में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य है वैश्विक स्तर पर युवा मुद्दों को उजागर करना और उनकी समाज के प्रति भागीदारी को बढ़ावा देना है। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और समानता जैसे विषयों पर ध्यान केन्द्रित करना जैसे युवा नेतृत्व को समर्थन देना, युवाओं के अधिकारों की रक्षा और उनकी आवाज को वैश्विक मंच पर स्थान देना।

यह दिवस प्रतिवर्ष एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है, जो वर्ष विशेष की जरूरतों और चुनौतियों के अनुसार निर्धारित किया जाता है। इस वर्ष 2025 की थीम है “Youth Leadership For A Sustainable Future” – “सतत भविष्य के लिए युवा नेतृत्व” । यह थीम इस दिशा में इशारा करती है, कि जलवायु परिवर्तन, सामाजिक न्याय एवं तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में युवा नेतृत्व एक सकारात्मक भूमिका निभा सके।

भारत में युवा शक्ति – भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है जहाँ 65% -से अधिक जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है। यह देश के लिए एक “Demographic Divident” है, जो यदि सही दिशा में निर्देशित किया जाय तो आर्थिक, सामाजिक एवं तकनीकी प्रगति में क्रांति ला सकता है। युवाओं की समस्याओं का समाधान किया जाय व युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन मिले, तो भारत आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूप से एक वैश्विक नेतृत्वकर्ता बन सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने के पीछे कई महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं। राष्ट्र के प्रति युवाओं की सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा देना इसका मुख्य उद्देश्य है। शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य एवं समानता जैसे विषयों पर ध्यान केन्द्रित करने हेतु भी यह दिवस मनाया जाता है। इसके साथ ही युवाओं के अधिकारों की रक्षा व उनकी उपस्थिति को एक वैश्विक मंच पर स्थान भी दिया जाता है। अगर युवा जागरूक, शिक्षित एवं संगठित हो, तो किसी भी समाज को बदलने में देर नहीं लगती।
विश्व के प्रत्येक राष्ट्र में युवाओं की अहम भूमिका होती है एवं उनकी कई जिम्मेदारियां भी होती हैं। युवाओं को अवसर के साथ-साथ कई जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। युवा, समाज में बदलाव लाने का माध्यम होते है। लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवाओं का बड़ा योगदान होता है। पर्यावरण संरक्षण एवं सतत् विकास में युवाओं की सहभागीदारी रहती है। तकनीकी नवाचार एवं स्टार्टअप के माध्यम से युवा अपने देश का विकास करते हैं। स्त्री-पुरुष समानता, नारी सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय एवं शान्ति के लिए युवाओं का हमेशा साथ रहता है।

युवाओं के विकास में शासन, समाज एवं परिवार सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार को शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय और स्वास्थ्य के लिए ठोस योजनाएं बनाकर युवाओं को प्रोत्साहन देना होगा। शैक्षणिक संस्थानों को, युवाओं को डिग्री के साथ-साथ उनके कौशल के आधारित भी ज्ञान देना होगा, जिससे युवाओं को अपनी प्रतिभा के अनुसार उनके रोजगार का माध्यम बन सके। समाज को युवाओं को सही दिशा में प्रेरित करना होगा एवं उन्हें सशक्त बनाने में सहयोग करना होगा।

युवाओं को परिवार के मार्गदर्शन की भी आवश्यकता होती है। परिवार के संस्कार किसी भी युवा के जीवन की बुनियाद होती है। परिवार के मूल्य, आदर्श एवं व्यवहार युवाओं को एक अच्छा इन्सान बनने में सहयोग करते हैं। परिवार से युवाओं को समझदारी से कार्य करने एवं नैतिक सिद्धान्तों पर टिके रहने की शिक्षा मिलती है। परिवार के संस्कार किसी भी राष्ट्र की संस्कृति का मूल आधार होते हैं। यदि बचपन से ही बच्चों को अच्छे संस्कार दिये जायें, तो वे न केवल अपने जीवन में सफल होते हैं, बल्कि समाज और देश की प्रगति के लिए भी मूल्यवान सिद्ध होते हैं।

शिक्षा का युवाओं के जीवन में अत्यधिक महत्व है। ज्ञान प्राप्त करने के अलावा शिक्षा, प्रत्येक युवा के सर्वांगीण विकास का आधार भी है। सही और गलत में भेदभाव करना, जीवन के नैतिक मूल्यों को समझना व समाज में जिम्मेदार नागरिक बनना यह शिक्षा ही हमें सिखाती है। शिक्षा एक ऐसा प्रकाश है जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है। यह युवाओं को आत्मनिर्भर बनाती है एवं उसे आत्मविश्वास भी प्रदान करती है। शिक्षा ही हमारे विचारों को स्पष्ट करता है, अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को समझने में सहयोग करता है। युवाओं के जीवन में शिक्षा का अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। राष्ट्र के विकास में सशक्त युवा अहम भूमिका निभाते हैं।

12 अगस्त अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस केवल एक प्रतीकात्मक दिवस नहीं है, बल्कि यह युवाओं को प्रेरणा देने, उनकी आवाज को बुलंद करने एवं समाज में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का अवसर है। युवा ही भविष्य के निर्माता हैं और उन्हें मार्गदर्शन, अवसर एवं मंच देने हम सभी का दायित्व है। युवा जागेगा तभी देश विकास की ओर आगे बढ़ेगा। इस दिन मनाया जाने वाला युवा दिवस, युवाओं को प्रेरित करने का अवसर है, उन्हें पहचान देने का एवं युवाओं की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण की ओर प्रोत्साहित करने का है। युवा शक्ति ही राष्ट्र की असली संपत्ति है। एक जागरूक युवा राष्ट्र की प्रगति में सहायक भी होता है।
“युवाओं के हाथों में कलम हो, आँखों में सपने हों और मन में बदलाव की आग हो तभी बनेगा एक समृद्ध, सशक्त एवं सुन्दर विश्व” डॉ. नीलिमा पिम्पलापुरे लेखिका, समाजसेविका, सागर


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